“The Knowledge Library”

Knowledge for All, without Barriers……….
An Initiative by: Kausik Chakraborty.

The Knowledge Library

कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में रोचक और कम ज्ञात तथ्य

कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में रोचक और कम ज्ञात तथ्य

अर्धरात्रि जन्म – श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अर्धरात्रि में कारागार में हुआ था।

आठवाँ अवतार – वे भगवान विष्णु के दस अवतारों में आठवें माने जाते हैं।

महत्वपूर्ण नक्षत्र – उनके जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र था, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।

कारागार में चमत्कार – जन्म होते ही कारागार के दरवाजे अपने आप खुल गए और पहरेदार सो गए।

कृष्ण शब्द का अर्थ – संस्कृत में ‘कृष्ण’ का अर्थ है ‘आकर्षण करने वाला’।

माखनचोर की लीला – बचपन में उन्हें माखन चोरी बहुत प्रिय थी, इसी कारण उन्हें ‘माखनचोर’ कहा जाता है।

गोवर्धन पूजा का आरंभ – कृष्ण ने इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराई।

गोकुल में पला-बढ़ा बालक – जन्म मथुरा में हुआ, पर पालन-पोषण नंद बाबा और यशोदा ने गोकुल में किया।

108 नाम – श्रीकृष्ण के 108 पवित्र नाम हैं, जिनका जप जन्माष्टमी पर विशेष माना जाता है।

रसलीला परंपरा – जन्माष्टमी की रात कई जगह रसलीला का आयोजन होता है, जो वृंदावन और मथुरा में विशेष प्रसिद्ध है।

उपवास परंपरा – भक्त अष्टमी तक उपवास रखते हैं और अर्धरात्रि जन्म के बाद फलाहार करते हैं।

दही-हांडी का संबंध – महाराष्ट्र में दही-हांडी की परंपरा कृष्ण के माखन चोरी की लीला से जुड़ी है।

घंटियों और शंखनाद का महत्व – जन्म के समय मंदिरों में शंख, घंटियां और नगाड़ों का वादन शुभ माना जाता है।

महाभारत में भूमिका – श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश कुरुक्षेत्र युद्ध में दिया।

कृष्ण की बांसुरी – बांसुरी उनकी पहचान है, जिससे वे सभी जीवों को मोहित कर लेते थे।

संपूर्ण भारत में विविधता – अलग-अलग राज्यों में जन्माष्टमी की पूजा पद्धतियां अलग होती हैं।

व्रत की वैज्ञानिकता – उपवास से शरीर की शुद्धि और मन की एकाग्रता बढ़ती है, जो ध्यान के लिए लाभकारी है।

मक्खन-मिश्री का भोग – जन्म के समय कृष्ण को मक्खन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।

स्वयंभू मंदिर – द्वारका, मथुरा और वृंदावन के कुछ मंदिरों को स्वयंभू (ईश्वरीय प्रकट) माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय उत्सव – ISKCON के माध्यम से जन्माष्टमी का आयोजन विश्वभर में धूमधाम से किया जाता है।

जन्म के तुरंत बाद स्थानांतरण – वसुदेव ने उन्हें टोकरी में रखकर यमुना नदी पार कर गोकुल पहुँचाया।

यमुना की लहरें शांत होना – श्रीकृष्ण को ले जाते समय यमुना नदी का जल बढ़ गया था, पर उनके चरण छूते ही शांत हो गया।

कंस का भय – कंस ने भविष्यवाणी सुनकर अपने बहन-बहनोई को कैद कर दिया था।

अष्टमी तिथि का रहस्य – अष्टमी तिथि अंधकार और रोहिणी नक्षत्र का संगम, दिव्य अवतार के लिए शुभ माना जाता है।

श्रीकृष्ण और चंद्रमा – जन्म के समय चंद्रमा अर्धचंद्र अवस्था में थे, जो उनके मस्तक पर चंद्रकला का प्रतीक बना।

कृष्ण और शंख – उनका पाञ्चजन्य शंख महाभारत युद्ध का आरंभ संकेत था।

मथुरा से द्वारका – जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने द्वारका नगरी बसाई।

कृष्ण का वर्ण – उनका वर्ण श्याम था, इसी कारण उन्हें ‘श्यामसुंदर’ कहा जाता है।

16 कलाओं के स्वामी – वे पूर्णावतार माने जाते हैं, जिनमें 16 कलाएं पूर्ण रूप से विद्यमान थीं।

कृष्ण और तुलसी – तुलसी पत्र के बिना उनका पूजन अधूरा माना जाता है।

श्रीकृष्ण और गोपियां – वे गोपियों के साथ रासलीला करते थे, जो भक्ति का उच्चतम रूप मानी जाती है।

जन्माष्टमी और झूला उत्सव – कई जगह जन्माष्टमी पर कृष्ण को झूले में बिठाकर झुलाया जाता है।

बालरूप की पूजा – जन्माष्टमी की रात कृष्ण के बाल रूप (लड्डू गोपाल) की पूजा होती है।

दही-हांडी की ऊँचाई – महाराष्ट्र में प्रतियोगिता के दौरान दही-हांडी 30-40 फीट की ऊँचाई पर बांधी जाती है।

श्रीकृष्ण का नामकरण – गोकुल में गर्गाचार्य ने उनका नाम ‘कृष्ण’ रखा।

गोकुल और वृंदावन का महत्व – इन स्थानों पर उनके अधिकांश बाल-लीला प्रसंग हुए।

अखंड भजन परंपरा – कई जगह जन्माष्टमी पर 24 घंटे अखंड भजन और कीर्तन चलता है।

नवीन वस्त्र और अलंकरण – इस दिन मंदिरों में श्रीकृष्ण को विशेष वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं।

बालकों की झांकी – कई जगह छोटे बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में सजाकर झांकी निकाली जाती है।

मोक्ष का प्रतीक – जन्माष्टमी केवल जन्म उत्सव नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और मोक्ष का संदेश देती है।

Krishna 108 Names in Hindi

Sign up to Receive Awesome Content in your Inbox, Frequently.

We don’t Spam!
Thank You for your Valuable Time

Also Read  The Bhagavad Gita 

Share this post

error: Content is protected !!