“The Knowledge Library”

Knowledge for All, without Barriers…

An Initiative by: Kausik Chakraborty.
06/12/2022 9:13 AM

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रोगाणुरोधी प्रतिरोध के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts About Antimicrobial Resistance-AMR)

 क्या है रोगाणुरोधी प्रतिरोध ?

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) का तात्पर्य किसी भी सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, वायरस, कवक, परजीवी, आदि) द्वारा एंटीमाइक्रोबियल दवाओं (जैसे एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल, एंटीवायरल, एंटीमाइरियल और एंटीहेलमिंटिक्स) जिनका उपयोग संक्रमण के इलाज के लिये किया जाता है, के खिलाफ प्रतिरोध हासिल कर लेने से है।
  • परिणामस्वरूप मानक उपचार अप्रभावी हो जाते हैं, संक्रमण जारी रहता है और दूसरों में फैल सकता है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध का आधार:

  • प्रतिरोध जीन की उपस्थिति के कारण कुछ बैक्टीरिया आंतरिक रूप से प्रतिरोधी होते हैं और इसलिये रोगाणुरोधी दवाओं के लगातार संपर्क में आने के कारण अपने शरीर को इन दवाओं के अनुरूप ढाल लेते हैं।
  • आनुवंशिक उत्परिवर्तन।
  • बैक्टीरिया प्रतिरोध को दो तरीके से प्राप्त कर सकते हैं:
    • शेष आबादी में मौजूद प्रतिरोधी जीन को साझा और स्थानांतरित करके, या
    • एंटीबायोटिक दवाएँ बैक्टीरिया को खत्म कर देती हैं या उनकी वृद्धि को रोक देती हैं, लेकिन लगातार इस्तेमाल से बैक्टीरिया में उत्परिवर्तन के कारण एक प्रतिरोध क्षमता पैदा हो जाती है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध के प्रसार के कारण:

  • रोगाणुरोधी दवा का दुरुपयोग और कृषि में अनुचित उपयोग।
  • दवा निर्माण स्थलों के आसपास संदूषण शामिल हैं, जहाँ अनुपचारित अपशिष्ट से अधिक मात्रा में सक्रिय रोगाणुरोधी वातावरण में मुक्त हो जाते है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध एक वैश्विक चिंता क्यों है?

  • AMR आधुनिक चिकित्सा के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न करता है। जीवाणुयुक्त और कवकीय संक्रमण के उपचार के लिये कार्यात्मक रोगाणुरोधी के बिना सामान्य शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं (जैसे-अंग प्रत्यारोपण,, मधुमेह प्रबंधन) के साथ-साथ कैंसर कीमोथेरेपी भी गैर-उपचारित संक्रमणों के जोखिम से युक्त हो जाएगी।
  • अस्पतालों में लंबे समय तक रहने तथा अतिरिक्त परीक्षणों और अधिक महंगी दवाओं के उपयोग के साथ स्वास्थ्य देखभाल की लागत बढ़ जाती है।
  • यह सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों की प्राप्ति को जोखिम को प्रभावित कर रहा है और सतत् विकास लक्ष्यों की उपलब्धि को खतरे में डाल रहा है।
  •  यह चुनौती इसलिये और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि विकास और उत्पादन के पर्याप्त प्रोत्साहन के अभाव में विगत तीन दशकों में एंटीबायोटिक दवाओं का कोई भी नया विकल्प बाज़ार में उपलब्ध नहीं हो पाया है।
  • 2019 में डब्ल्यूएचओ ने नैदानिक विकास (Clinical Development) में 32 एंटीबायोटिक दवाओं की पहचान की जो डब्ल्यूएचओ की प्राथमिकता वाले रोगजनकों की सूची को संबोधित करते हैं, जिनमें से केवल छह को अभिनव (Innovative) के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
  • यदि लोग एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के तरीके को नहीं बदलते हैं, तो नए एंटीबायोटिक्स भी वर्तमान के समान ही प्रभावित होंगे और अप्रभावी हो जाएंगे।
  • इसके अलावा, गुणवत्ता वाले रोगाणुरोधी तक पहुंच की कमी एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। एंटीबायोटिक की कमी विकास के सभी स्तरों और विशेष रूप से स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में देशों को प्रभावित कर रही है।
  • राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं और उनकी स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए एएमआर की लागत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लंबे समय तक अस्पताल में रहने और अधिक महंगी और गहन देखभाल की आवश्यकता के माध्यम से रोगियों या उनके देखभाल करने वालों की उत्पादकता को प्रभावित करती है।

भारत में AMR

रोगाणुरोधी प्रतिरोध
  • भारत में बड़ी आबादी के संयोजन के साथ बढ़ती हुई आय जो एंटीबायोटिक दवाओं की खरीद की सुविधा प्रदान करती है, संक्रामक रोगों का उच्च बोझ और एंटीबायोटिक दवाओं के लिये आसान ओवर-द-काउंटर उपयोग, प्रतिरोधी जीन की पीढ़ी को बढ़ावा देती हैं।
  • भारत में सूक्ष्मजीवों (जीवाणु और विषाणु सहित) के कारण सेप्सिस से हर वर्ष 56,000 से अधिक नवजात बच्चों की मौत होती हैं जो पहली पंक्ति के एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी हैं।
  • भारत ने टीकाकरण कवरेज को कम करने के लिये निगरानी और जवाबदेही में सुधार करके अतिरिक्त नियोजन और अतिरिक्त तंत्र को मज़बूत करने के लिये मिशन इंद्रधनुष जैसी कई कार्य किये गए हैं।
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने AMR को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मंत्रालय के सहयोगात्मक कार्यों के लिये शीर्ष 10 प्राथमिकताओं में से एक के रूप में पहचाना है।
  • AMR प्रतिरोध 2017-2021 पर राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार की गई है।

भारत में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग में हालिया वृद्धि के क्या कारण हैं?

एंटीबायोटिक के उपयोग में तेज वृद्धि के कारण इस प्रकार हैं:

  • उच्च रोग भार।
  • बढ़ती आमदनी।
  • जनता के लिए इन दवाओं की आसान और सस्ती उपलब्धता।
  • एंटीबायोटिक दवाओं की अनियंत्रित बिक्री।
  • खराब सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा।
  • एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता की कमी।

माइक्रोबियल प्रतिरोध पर डब्ल्यूएचओ की वैश्विक कार्य योजना की रणनीतियाँ क्या हैं?

  • प्रभावी संचार, शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से रोगाणुरोधी प्रतिरोध के बारे में जागरूकता और समझ में सुधार करना।
  • निगरानी और अनुसंधान के माध्यम से ज्ञान और साक्ष्य आधार को मजबूत करना।
  • प्रभावी स्वच्छता, स्वच्छता और संक्रमण की रोकथाम के उपायों के माध्यम से संक्रमण की घटनाओं को कम करना।
  • मानव और पशु स्वास्थ्य में रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग को अनुकूलित करने के लिए।
  • टिकाऊ निवेश के लिए आर्थिक मामला विकसित करना जो सभी देशों की जरूरतों को ध्यान में रखता है और नई दवाओं, नैदानिक उपकरणों, टीकों और अन्य हस्तक्षेपों में निवेश बढ़ाने के लिए।

रेड लाइन अभियान क्या है?

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध जागरूकता अभियान ने लोगों से डॉक्टर के पर्चे के बिना एंटीबायोटिक दवाओं सहित लाल ऊर्ध्वाधर रेखा के साथ चिह्नित दवाओं का उपयोग नहीं करने का आग्रह किया है।
  • इन दवाओं को ‘रेड लाइन वाली दवाएं’ कहा जाता है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कहीन उपयोग की जांच करने के लिए, ‘रेड लाइन’ उपयोगकर्ताओं को उन्हें अन्य दवाओं से अलग करने में मदद करेगी।
  • इस अभियान का उद्देश्य टीबी, मलेरिया, मूत्र पथ के संक्रमण और यहां तक कि एचआईवी सहित कई गंभीर बीमारियों के लिए दवा प्रतिरोध पैदा करने वाले एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक नुस्खे और ओवर-द-काउंटर बिक्री को हतोत्साहित करना है।

आगे की राह

रोगाणुरोधी प्रतिरोध कोविड-19 या जलवायु परिवर्तन जितना ही विनाशकारी है। उस मानव त्रासदी के पैमाने की कल्पना कीजिए, जब हमारे ठीक होने की क्षमता समाप्त हो जाए – जब दवाएं बेअसर होने लगें और बीमारी का इलाज न हो पाये। रोगाणुरोधी प्रतिरोधक की वजह से हम जल्द ही इस अवस्था में पहुंच सकते हैं।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के रोकथाम के लिए किये जाने वाले उपाय

  • मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से महत्त्वपूर्ण रोगाणुरोधी दवाओं का प्रयोग पशुओं या फसलों के लिए न किया जाए। आप इसे “संरक्षण एजेंडा” कह सकते हैं।
  • “विकास एजेंडा” को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम रोगाणुरोधी दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के बिना खाद्य उत्पादन में वृद्धि जारी रखें।
  • और “पर्यावरण एजेंडा” यह सुनिश्चित करना है कि औषधि उद्योग और मछली या पॉल्ट्री फॉर्म जैसे अन्य स्रोतों से निकलने वाले अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन किया जाए और उन्हें नियंत्रित किया जाए।
  • हमारी दुनिया में खेती से निकलने वाला कचरा कभी कचरा नहीं होता, बल्कि जमीन के लिए संसाधन होते हैं। लिहाजा हमें रोगाणुरोधी के उपयोग को रोकने की आवश्यकता है, ताकि खाद का पुनर्उपयोग और पुनर्चक्रण मुमकिन हो पाये। हमें ‘महत्त्वपूर्ण सूची’ का संरक्षण करना चाहिए; हमें इसका उपयोग कम से कम करना चाहिए और रोकथाम में निवेश करना चाहिए ताकि हमें अच्छे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रोगाणुरोधी दवाओं का उपयोग न करना पड़े।
  • साथ ही स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई जैसे महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को भी अपने एजेंडे में शामिल करना चाहिए, ताकि रोगाणुरोधी दवाओं के इस्तेमाल को न्यूनतम किया जा सके और जितना मुमकिन हो, रोगाणुरोधी प्रतिरोधक से बचाव हो पाये। यह हमारी दुनिया के लिए ‘विध्वंस या निर्माण’ का एक और एजेंडा हो सकता है।

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